अलवर के करणी माता के मंदिर की पूरी जानकारी हिंदी में जानिए। Alwar karni Mata ke Mandir ki puri jankari hindi me

 करणी माता के मंदिर का रहस्य जाने हिंदी में, karni Mata ke Mandir ki puri jankari hindi me



अलवर के करणी माता मंदिर में दूर-दूर से भक्त आते हैं और माता का दर्शन करके जाते हैं तो चलिए दोस्तों मंदिर का पूरा इतिहास जानिए



अलवर के राजा ने पूर्ण रियासत के द्वितीय शासक बखतावर ने 1792 में से 1815 के अंतर्गत पूरी हो जाने पर बाला किला क्षेत्र को करणी माता मंदिर में स्थापित कर दिया और पूर्व रियासत के समय यहां पर करणी माता की प्रतिमा की पूजा अर्चना भी की जाती थी बाद में देवस्थान के विभाग पर पूजा का दायित्व संभाल रखा था


तो दोस्तों अलवर मे करनी माता मंदिर में राजा ने मान्यता पूरी होने तक स्थापना करवाई थी इस इतिहास के बाद करणी माता का मंदिर अलवर में राजा पूरी ने बनवाया था अलवर के पूर्व रियासत के समय राजा नरेंद्र सिंह राठौड़ के पेट में दर्द होने लगा एक दिन वह पूर्व शासक भगवत सिंह के पेट में अचानक से दर्द होने लगा




 नीम हकीमो के काफी इलाज के बावजूद भी उनकी तबीयत सही नहीं हुई थी वेद ने कहा कि तुम करनी माता के मंदिर में दर्शन के लिए जाओ तो माता रानी सब कुछ ठीक कर देगी और करणी माता के दर्शन के लिए निकल पड़े दर्शन के बाद राजा भगवत सिंह का पेट दर्द बिल्कुल सही हो गया था फिर उन्होंने करणी माता के प्रति आस्था जगाई


तभी वहां पर एक सफेद चीन माता के बालाकिला पर आकर बैठ जाती है तो पूर्व शासक ने चीन को बहुत गौर से देखा था इसके बाद राजा भगत सिंह का पेट दर्द ठीक हो गया और वह उस उपलक्ष की खुशी में जश्न मनाया और करणी माता का मंदिर में उन्होंने प्रसाद का भंडारा लगाया और करनी माता के मंदिर के प्रति आस्था जगाई 



तभी उन्होंने सन 1982 में मंदिर के आसपास सफाई करवाना चालू कर दिया सड़क के बनने के बाद लोगों की इस मंदिर के प्रति आस्था जगी और फिर लोग वहां पर नवरात्रा करने लगे और उधर बहुत अच्छा मेला भरने लगा और मेले को देखने के लिए दूर-दूर से भक्त जन आते हैं और मेला बहुत अति सुंदर भरता है मेले का भक्त आनंद पूर्वक मजा लेते हैं और उन्हें बीच-बीच में प्रसाद भी मिलता है


                  बालकीला के बारे कुछ जानकारी


हेलो दोस्तों काली माता में बहुत सारे चूहे पाए जाते हैं। और वहां पर एक अति सुंदर महल  बनी हुई है जोकि बाला किला है और वहां पर सुसाइड प्वाइंट भी है करणी माता का मंदिर पहाड़ के ऊपर है और उधर चढ़ने के लिए कच्चे रास्ते से भी जा सकते हैं और पक्के रास्ते से जा सकते हैं दोनों ही रास्ते बहुत सुंदर हैं किसी से भी जा सकते हैं भक्तजन और वहां पर उसको सरिस्का के जंगल के नाम से भी जाना जाता है वहां से लोग पैदल यात्रा करते हैं कच्चे रास्ते से और रोड वाले से लोग साधन से भी जाते हैं और पैदल ही जाते हैं



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