सामान्य वित्तीय एवं लेखा नियम (GF & AR) : नियम-1 से 4 तक

प्रस्तावना (INTRODUCTION)
(नियम 1 से 4 तक)

सामान्य वित्तीय एवं लेखा नियम (GF & AR)  नियम-1  से 4 तक

  • सामान्य वित्तीय एवं लेखा नियम (GE & AR) 25-10-1993 से लागू है। 
  • कोषागार नियम 01-04-1951 से लागू है। 

सामान्य वित्तीय एवं लेखा नियम-1 

  • सामान्य वित्तीय एवं लेखा नियम खण्ड-1 के नियम राज्यपाल के अनिवार्य कार्यकारी आदेश है।
  • इस खण्ड के नियमों में उस प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है, जिसका अनुसरण राजस्थान सरकार के अधीनस्थ विभिन्न प्राधिकारियों द्वारा, उन्हें सौंपे गए कार्यों के निर्वहन हेतु आवश्यक निधि प्राप्त करने एवं खर्च करने में करना चाहिए। 
  • सरकारी राशि की प्राप्ति, अभिरक्षा (Custody) एवं भुगतान के मामले में ये नियम कोषागार नियमों के पूरक हैं। संविधान के अनुच्छेद 283(2) में कोषागार नियमों का वर्णन किया गया है। 

नियम-2 परिभाषाएँ (Definitions)

(i) महालेखाकार (Accountant General):-

  • लेखा एवं लेखा परीक्षा (Audit) या लेखा का वह कार्यालयाध्यक्ष, जो राजस्थान सरकार के लेखे रखता है, अर्थात् महालेखाकार राजस्थान। 
  • महालेखाकार राजस्थान का कार्यालय जयपुर में स्थित है। 
  • यह राजकीय लेखों का अंकेक्षण (Audit) करता है एवं विनियोग लेखे तैयार करता है। यह व्यय एवं राजस्व के नियंत्रण में सहायता करता है। 

(ii) विनियोग (Appropriation) :-

  • निर्धारित व्यय को करने के लिए आवंटित राशि की प्राथमिक इकाई में शामिल की गयी निधि, विनियोग कहलाती है। 

(iii) बैंक (Bank): 

  • स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया (SBI) की कोई शाखा जो RBI Act, 1934 के प्रावधानों के अनुसार कार्य करती है, या SBI का कोई एजेन्ट / सहायक बैंक, या 
  • RBI Act, 1934 द्वारा अधिकृत कोई अन्य बैंक। 
  • राजस्थान में सामान्यतः राजकीय लेन-देन SBBJ द्वारा किया जाता है। 
  • RBI द्वारा निजी बैंकों ICICI Bank, AXIS Bank, HDFC Bank को भी राजकीय लेनदेनों के लिए अधिकृत किया गया है। 

(क) ई-फोकल पॉइंट शाखा (E-Focal Point Branch): 

  • भाग लेने वाले बैंक की ई-फोकल पाइंट शाखा तत्पर और यथार्थ लेखा और उसकी संग्रहण रिपोर्ट को प्रतिदिन ई-कोषागार को भेजने के लिये उत्तरदायी होगी।[आदेश सं.प. 1(4) वित्त / साविलेनि / 2006 / दिनांक 11-09-2013 द्वारा अंत: स्थापित] 

(iv) सक्षम प्राधिकारी (CompetentAuthority): 

  • सरकार या कोई ऐसा अन्य प्राधिकारी जिसे सरकार द्वारा संबंधित शक्तियाँ प्रत्यायोजित की जाएँ, सक्षम प्राधिकारी कहलाता है। 

(v) नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (Comptroller and Auditor General); 

  • इससे अभिप्राय 'भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक' (Comptroller and Auditor General of India) से है।

(vi) राज्य की संचित निधि (Consolidated Fund of the State): 

  • इससे आशय संविधान के अनुच्छेद-266 (1) में परिभाषित ऐसी निधि से है, जिसमें | राजस्थान सरकार द्वारा प्राप्त समस्त राजस्व, कोषागार बिलों, उधारों (Loans) एवं | मार्गोपाय अग्रिमों (Ways and Means Advances) के निर्गम द्वारा प्राप्त किए गए| समस्त राजस्व तथा उधारों की अदायगी (Repayment of Loans) से प्राप्त समस्त धनराशि शामिल है। 

(vii) संविधान (The Constituton) : 

  • इससे अभिप्राय भारत के संविधान से है। 

(viii) राज्य की आकस्मिकता निधि (Contingency fund of the State): 

  • यह निधि संविधान के अनुच्छेद-267(2) में परिभाषित है। इसमें समय-समय पर ऐसी राशियों को जमा किया जाएगा, जिन्हें विधि द्वारा निर्धारित सक्षम बनाया गया है। किया गया हो तथा उस निधि में से अग्रिम रूप से धन देने के लिए राज्यपाल को ही सक्षम बनाया गया है यह अग्रिम आवंटन संविधान के अनुच्छेद 205 या 206 के अधीन विधि द्वारा / राज्य विधानमण्डल द्वारा बाद में अनुमोदित कर दिये जाने की शर्त पर किया जाता है। आकस्मिकता निधि में से धन खर्च करने के लिए राज्यपाल को संविधान के अनुच्छेद - 205, 206 में शक्ति दी गई है। 

(ix) नियंत्रक अधिकारी (Controlling officer): 

  • इससे अभिप्राय विभागाध्यक्ष या ऐसा अन्य विभागीय अधिकारी, जिसे विभाग के अधीनस्थ प्राधिकारियों द्वारा किए गए व्यय एवं / या राजस्व की वसूली को नियंत्रित करने का दायित्व सौंपा गया है। 

(x) विस्तृत शीर्ष (Detailed Head): 

  • अनुदान मांगों के प्रयोजन के लिये बजट की प्राथमिक इकाई विस्तृत शीर्ष कहलाती है। 

(xi) आहरण एवं वितरण अधिकारी (Drawing & Disbursing officer/DDO): 

  • कार्यालयाध्यक्ष या अन्य कोई राजपत्रित अधिकारी, जो वेतन, भत्ते एवम् अन्य प्रकार के बिलों पर हस्ताक्षर कर कोषागार से राशि आहरित करने के लिए तथा वितरण करने के लिए अधिकृत किया जाता है, DDO कहलाता है। 

(xii) वित्त विभाग (Financial Department): 

  • इससे अभिप्राय राजस्थान के वित्त विभाग से है।

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